Seven Times News

what they forgot to cover

हिन्दी प्रकाशकों को पाठक बनाने के नए तरीके खोजने होंगे : राजेन्द्र यादव

नई दिल्ली :  ‘हँस’ के सम्पादक और विख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव ने कहा कि पारम्‍परिक तरीकों से पाठकों तक जाना अब पर्याप्त नहीं इसके लिए हिन्दी प्रकाशकों को नये तरीके खोजने होंगे। वह ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक श्रृंखला ‘मेरी प्रिय कथाएं’ का लोकार्पण कर रहे थे। हिन्दी भवन में 28 सि‍तम्‍बर 2012 को आयोजित इस लोकार्पण समारोह में उन्होंने इस पुस्तक श्रृंखला को भी महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्थापित लेखकों की ऐसी पुस्तकें आना तो उचित ही है लेकिन असल चुनौती यह है कि नये लेखकों के लिये भी ऐसी कोई श्रृंखला हो। उन्होंने लेखन की चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि लेखक लिख लेने के बाद पाठक और उससे भी अधिक आलोचक से मान्यता चाहता है। यहीं वे लेखक डगमगा जाते हैं जो आलोचकों की चिंता करते हैं, यदि वे पाठकों की चिंता करेंगे तो अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकेंगे। किसी दबाव के बिना लिखने पर ही भीतर का श्रेष्ठ आ सकता है। इससे पहले मंच पर राजेन्द्र यादव के साथ उपस्थित मुख्य अतिथि बीएल गौड़, विशेष अथिति डॉ. राजेंद्र अग्रवाल, आलोचक-कथाकार अर्चना वर्मा, कथाकार संजीव सहित अन्य अथितियों ने इस श्रृंखला के पहले सेट का लोकार्पण किया। इस सेट में विख्यात कथाकार संजीव, स्वयं प्रकाश, सुधा अरोड़ा, हबीब कैफ़ी, विजय और अशोक गुप्ता की पुस्तकें हैं। इन पुस्तकों में अपनी प्रिय कथाओं का चुनाव स्वयं लेखक ने किया है।

This slideshow requires JavaScript.

लोकार्पण समारोह में पुस्तकों पर हुई चर्चा में सबसे पहले युवा आलोचक संजीव कुमार ने कथाकार संजीव और हबीब कैफ़ी की कहानियों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संजीव की कहानी ‘अपराध’ बहुत चर्चित है लेकिन लगभग तीस सालों के बाद भी इसमें जबरदस्त पठनीयता का कारण विषय की गंभीरता और प्रस्तुतिकरण ही है। हबीब कैफ़ी की कहानियों को भी उन्होंने उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि उनकी चर्चा कम ही हुई है तथापि उनकी कहानियां प्रभावशाली ढंग से अपनी बात कहने में सक्षम हैं। युवा आलोचक और ‘बनास जन’ के सम्‍पादक पल्लव ने स्वयं प्रकाश की कहानियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी ये कहानियाँ सचमुच कथाएं ही हैं जिनमें लेखक उत्तर आधुनिक परिदृश्य में अपनी कहन के लिए नितांत देशज मुहावरा और शैली तलाश करता है। उन्होंने पुस्तक की कुछ कहानियों से खास अंशों का पाठ करते हुए बातें कि किस तरह ये कहानियाँ पाठकों को महज़ उपभोक्ता हो जाने का प्रत्याख्यान रचतीं हैं। उन्होंने हबीब कैफ़ी की कहानियों की चर्चा में कहा कि राजस्थान के जीवन और मुस्लिम परिवेश के कई दुलर्भ चित्र उनकी कहानियों में आये हैं। कथाकार समीक्षक विपिन कुमार शर्मा ने श्रृंखला के कथाकारों के कृतित्त्व में से किये गये इस चुनाव की प्रासंगिकता दर्शाने वाली कहानियों की चर्चा की। युवा कथाकार विवेक मिश्र ने चर्चा में सुधा अरोड़ा और विजय के कहानी लेखन पर प्रकाश डाला। कथा चर्चा में  मुख्य अतिथि बीएल गौड़ और विशेष अथिति डॉ. राजेंद्र अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किये।

आलोचक-कथाकार अर्चना वर्मा ने कहा कि लेखक के निकट रहने वाली इन कहानियों को चुनना अपने ढंग से सार्थक है। लेखकीय वक्तव्य में कथाकार संजीव ने कहा कि मुझे जितना बोलना था वह कहानी में ही बोल चुका। उन्होंने भारतीय वांग्मय की समृद्धता के समक्ष ऐसी पुस्तकों के बार-बार प्रकाशन की उपयोगिता बताई। कथाकार विजय और अशोक गुप्ता ने भी संक्षिप्त लेखकीय वक्तव्य दिये।

अंत में ज्योतिपर्व प्रकाशन की ओर से ज्योति राय ने सभी का आभार माना। संयोजन कर रहे कवि-ब्लागर अरुण राय ने ज्योतिपर्व प्रकाशन की इस पुस्तक श्रृंखला की जानकारी दी और बताया कि शीघ्र ही इस श्रृंखला में पाठक ओम प्रकाश वाल्मीकि. पानू खोलिया, असगर वजाहत, चरण सिंह पथिक सहित अनेक महत्त्वपूर्ण कथाकारों की पुस्तकें पढ़ सकेंगे। आयोजन में कथाकार सुभाष नीरव, कथाकार अजय नावरिया, कवि-गज़लकार भरत तिवारीशजर‘, आलोचक संजीव ठाकुर, राजकमल, वन्दना ग्रोवर, रश्मि, सतीश सक्सेना, मनोज कुमार, डॉ.रश्मिराधा रमण सहित बड़ी संख्या में पाठक-पत्रकार उपस्थित थे।

प्रस्तुति : अरुण राय

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Enter your email address to follow this blog and receive notifications of new posts by email.

Join 350 other followers

Categories

%d bloggers like this: